उत्तर प्रदेश

संभल हिंसा मामले में बड़ा फैसला, मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द! यूपी सरकार पर 10 लाख रूपये का जुर्माना

संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा, केवल कबूलनामा पर्याप्त आधार नहीं और यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Sambhal Violence Case: संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई निवारक हिरासत रद्द कर दी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि केवल किसी व्यक्ति के कथित कबूलनामे को NSA के तहत हिरासत का अकेला आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹10 लाख की लागत भी लगाई।

अदालत ने हिरासत पर क्यों उठाए सवाल?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निवारक हिरासत का आदेश देते समय संबंधित अधिकारी को मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों पर स्वतंत्र रूप से विचार करना जरूरी है। अदालत के मुताबिक, अफरोज के मामले में इस प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया और हिरासत का आदेश उचित आधार पर कायम नहीं रह सकता। अफरोज को 2024 की संभल हिंसा में कथित भूमिका के आरोप में हिरासत में लिया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश प्रशासन ने उनके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

क्या है संभल हिंसा का मामला?

नवंबर 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान तनाव बढ़ गया था। यह सर्वे एक मुकदमे के बाद कराया जा रहा था, जिसमें मस्जिद परिसर को लेकर दावा किया गया था कि वहां पहले मंदिर था। 24 नवंबर को सर्वे के दौरान विरोध कर रही भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। घटना में चार लोगों की मौत हुई थी।

मुल्ला अफरोज पर इस हिंसा में कथित भूमिका को लेकर कार्रवाई की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अब NSA के तहत उनकी निवारक हिरासत को कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं माना है। यह फैसला केवल हिरासत के आदेश से जुड़ा है; इससे उनके खिलाफ मूल आपराधिक मामले में लगे आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं होता।

NSA क्या है?

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत सरकार कुछ परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को निवारक हिरासत में रख सकती है, ताकि संभावित गतिविधियों से सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा न हो। ऐसे मामलों में हिरासत के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों का पालन जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि निवारक हिरासत जैसी कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया और पर्याप्त आधार का पालन अनिवार्य है।

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